Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 10, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 10, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
दशरथ उवाच ।
प्रतिहार महाबाहुं रामं सत्यपराक्रमम् ।
सलक्ष्मणमविघ्नेन पुण्यार्थं शीघ्रमानय ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
दशरथ ने
कहा : हे प्रतीहार, अमोघ (सफल) पराक्रमवाले आजानुबाहु श्रीरामचन्द्र को महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ
की निर्विघ्न सिद्धि के लिए लक्ष्मण के साथ यहाँ शीघ्र ले आओ