Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 10, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 10, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अनुयातौ तथैवैतौ राजञ्छत्रुघ्नलक्ष्मणौ ।
तादृशावेव तस्यैव प्रतिबिम्बाविव स्थितौ ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
राजन्, सर्वदा श्रीरामचन्द्र का अनुसरण करनेवाले शत्रुघ्न और लक्ष्मण भी श्रीरामचन्द्रजी के
समान दुर्बल हो रहे हैं, अर्थात् रामचन्द्रजी के ठीक प्रतिबिम्ब के समान हो रहे हैं