Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 10, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 10, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
रघुकाननशालेन रामेण रिपुघातिना ।
भृशमित्थं स्थितेनैव वयं खेदमुपागताः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
रघुवंशरूप महाअरण्य में शाल वृक्ष के समान, शत्रुओं का मर्दन करने में समर्थ
श्रीरामचन्द्रजी की ऐसी अवस्था देखकर हम लोगों को अत्यन्त खेद हो रहा है