Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
एष मोहो रघुपतेर्नापद्भ्यो न च रागतः ।
विवेकवैराग्यवतो बोध एव महोदयः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
वैराग्य ओर
विवेक से युक्त श्रीरामचन्द्रजी का यह मोह किन्ही आपत्तियों से अथवा रागवश नहीं है, किन्तु यह
महाफलदायक बोध ही है