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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 11, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

एतस्मिन्मार्जिते युक्त्या मोहे स रघुनन्दनः । विश्रान्तिमेष्यति पदे तस्मिन्वयमिवोत्तमे ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

उपाय द्वारा उक्त मोह के दूर कर देने पर श्रीरामचन्द्रजी हम लोगों की भाँति "तद्विष्णोः परमं पदम्‌" इत्यादि श्रुति में प्रसिद्ध परम पद अर्थात्‌ अपनी आत्मा में विश्रान्ति को प्राप्त होंगे अर्थात्‌ आत्माराम हो जायेंगे