Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 12, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 12, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
शून्या मन्मुखवृत्तीस्ताः शुष्करोदननीरसाः ।
विवेक एव हृत्संस्थो ममैकान्तेषु पश्यति ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
अश्लुरहित
शुष्क रोदन से प्रीतिशून्य अतएव हर्षादिशून्य मेरे मुख के कृत्रिम स्मित, अभिलाप आदि वृत्तियों को
एकान्त में मेरा अन्त:करणस्थ विवेक ही देखता है