Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 16, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
वह्नेरुष्णतरः शैलादपि कष्टतरक्रमः ।
वज्रादपि दृढो ब्रह्मन्दुर्निग्रहमनोग्रहः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, मन अग्नि से भी अधिक
उष्ण, पर्वत से भी दुरारोह, वज्र से भी बढ़कर कठोर है, इसलिए मनरूपी ग्रह दुःख से भी गृहीत (वश
में) नहीं हो सकता