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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 16, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 16, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

न कदाचन मे चेतः स्वामालूनविशीर्णताम् । त्यजत्याकुलया वृत्त्या चञ्चलत्वमिवार्णवः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे समुद्र अपनी चंचलता का त्याग नहीं करता, वैसे ही चिन्तासक्त और च॑चलस्वभाव मेरा मन भी स्थूल और सूक्ष्म अवयवो के विनाश का त्याग नहीं करता