Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 18, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
देहनाम्नि वने शून्ये बहुगर्तसमाकुले ।
तनूरुहासंख्यतरौ विश्वासं कोऽधिगच्छति ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
रोमरूपी असंख्य वृक्ष और इन्द्रियरूपी अनेक गड्ढों से
युक्त देहनामक निर्जन वन में कौन पुरुष विश्वास को (यह चिरकाल तक निःशंक होकर रहने योग्य है,
ऐसी प्रतीति को) प्राप्त होगा ?