Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 18, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
मिथ्याज्ञानविकारेऽस्मिन्स्वप्नसंभ्रमपत्तने ।
काये स्फुटतरापाये क्षणमास्था न मे द्विज ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञानजनित हे, स्वप्नरूपी भ्रान्तियों का आधार है और इसका विनाश सर्वथा स्पष्ट है, इसलिए इस
शरीर के प्रति मेरा क्षणभर के लिए आदर भी नहीं है