Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
दुरीहालब्धलक्षाणि बहुवक्रोल्बणानि च ।
बालस्य यानि दुःखानि मुने तानि न कस्यचित् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, बालक को दुष्ट चेष्टाओं या दुष्ट मनोरथो से उत्पन्न ओर भाँति भाँति के वंचना के उपायों से
भीषण जो दुःख होते हैं, वे दूसरे किसी को नहीं होते