Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अन्तश्चित्तेरशक्तस्य शीतातपनिवारणे ।
को विशेषो महाबुद्धे बालस्योर्वीरुहस्तथा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
है महामते, बालक के मन में शीत और ताप का अनुभव तो होता है, पर वह उनका निवारण नहीं
कर सकता, इसलिए बालक और वृक्ष में क्या भेद है अर्थात् बालक वृक्ष के समान जड़ है