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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 19, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

सकलदोषदशाविहताशयं शरणमप्यविवेकविलासिनः । इह न कस्यचिदेव महामुने भवति बाल्यमलं परितुष्टये ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

महामुने, सम्पूर्ण दोषपूर्ण दशाओं से दूषित किसी की रोकटोक के बिना स्वच्छन्द विहार करनेवाले अविवेक का घर बाल्यकाल किसी के भी सन्तोष के लिए नहीं हो सकता