Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 2, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
वक्तुं तदेवमेवार्थमहमागतवानयम् ।
कुरु लोकहितार्थं त्वं शास्त्रमित्युक्तवानजः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए
हमारा अनुरोध है, आप लोगों के हित के लिए इस रामायण महाशास्त्र को शीघ्र प्रकाशित कीजिए । यह
कहने के लिए (४) ही मैं (८५) आपके पास आया हू