Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 2, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्प्रयाते भगवत्यहं विस्मयमागतः । पुनस्तत्र भरद्वाजमपृच्छं स्वस्थया धिया ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी के आने पर मुझे अत्यन्त विस्मय हो गया था, इसलिए उस समय मैं उनके वाक्य का मर्म नहीं समझ सका । उनके चले जानेपर मैंने चित्त में स्वस्थता प्राप्त कर स्वस्थ बुद्धि से वहाँ पर स्थित भरद्वाज से पूछा