Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 2, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
निर्दुःखितां यथैते नु प्राप्तास्तद्ब्रूहि मे स्फुटम् ।
तथैवाहं भविष्यामि ततो जनतया सह ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, किस प्रकार उन्होने
दुःखमार्ग का अतिक्रमण किया था, मुझे उसका विशदरूप से उपदेश दीजिए मैं ओर संसार के अन्य
मानव (आपके उपदेशश्रवण से कृतार्थ जनता) हम सभी वैसे ही आचरण करेगे ओर वैसे आचरण
कर संसारसंकट से मुक्ति प्राप्त करेगे