Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 2, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 2, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
तत एते कथोपाया भरद्वाजेन धीमता ।
कस्मिंश्चिन्मेरुगहने ब्रह्मणोऽग्र उदाहृताः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
मेघावी भरद्वाज ने मुझसे पूर्वरामायण को प्राप्त कर सुमेरु पर्वतस्थ किसी
वन में उसे ब्रह्मा को सुनाया