Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 21, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कामनाम्ना किरातेन विकीर्णा मुग्धचेतसाम् ।
नार्यो नरविहंगानामङ्गबन्धनवागुराः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिश्रेष्ठ, कामरूपी व्याध ने मूढबुद्धि मनुष्यरूपी पक्षियों
को फँसाने के लिए रत्रीरूपी जाल फैला रक्खे हे, अर्थात् जैसे व्याध दाना चरने के लिए लालायित
पक्षियों को फँसाने के लिए जाल बिछाते हैं, वैसे ही कामदेवने मूढमति (सांसारिक असत् विषयों को
सच समझनेवाले) लोगों को फँसाने के लिए स्त्रियाँ, जाल की नाई, इधर उधर बिखेर रक्खी हैं