Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 21, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
केशाः श्मशानवृक्षेषु यान्ति चामरलेखिकाम् ।
अस्थीन्युडुवदाभान्ति दिनैरवनिमण्डले ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
उनके सिर के बाल राख से घूसर होने के कारण श्मशान के वृक्षों में चँवर जैसे मालूम
पड़ते हैं और उनकी मांस और रक्त से शून्य सफेद हड्डियाँ पृथिवी में तारों के समान चमचमाती मालूम
होती है