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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 22, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

जरासुधालेपसिते शरीरान्तःपुरान्तरे । अशक्तिरार्तिरापच्च तिष्ठन्ति सुखमङ्गनाः ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

वृद्धावस्थारूपी चूने के लेप से (पुताई से) शुभ्र शरीररूपी अन्तःपुर के (रनवास के) भीतर अशक्ति (सामर्थ्य का अभाव), पीडा ओर आपत्तिरूपी महिलाएँ बड़े चैन से रहती हैं