Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 24, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 24, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
चण्डी चतुरसंचारा सर्वमातृगणान्विता ।
संसारवनविन्यस्ता व्याघ्री भूतौघघातिनी ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
चलने में बडी दक्ष अर्थात् शीघ्र चलनेवाली सब
मातृगणो से युक्त ओर बाधिन के समान प्राणियों का नाश करनेवाली इस राजकुमाररूपी काल की प्रिय
पत्नी कालरात्रि संसाररूपी वन में विहार करने के लिए नियुक्त है