Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 3, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
निर्गतः स्वपुरात्पौरैस्तूर्यघोषेण वादितः ।
पीयमानः पुरस्त्रीणां नेत्रैर्भृङ्गौघभङ्गुरैः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
नगरललनाओं से भँवरों की पंक्ति के समान चंचल नेत्रं द्वारा बड़े आदर के साथ
देखे जा रहे श्रीरामचन्द्रजी जब नगर से निकले तो नगरवासियों ने उनकी यात्रा के उपलक्ष में मंगल के
लिए तूरीघोष से उनका अभिनन्दन किया