Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verses 9–11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verses 9–11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 9,10
संस्कृत श्लोक
ईदृशी यज्ञदीक्षा सा मम तस्मिन्महाक्रतौ ।
त्वत्प्रसादादविघ्नेन प्रापयेयं महाफलम् ॥ ९ ॥
त्रातुमर्हसि मामार्तं शरणार्थिनमागतम् ।
अर्थिनां यन्निराशत्वं सत्तमेऽभिभवो हि सः ॥ १० ॥
तवास्ति तनयः श्रीमान्दृप्तशार्दूलविक्रमः ।
महेन्द्रसदृशो वीर्ये रामो रक्षोविदारणः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
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