Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 9, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 9, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
इक्ष्वाकुवंशजातोऽपि स्वयं दशरथोऽपि सन् ।
न पालयसि चेद्वाक्यं कोऽपरः पालयिष्यति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
लोक में यह प्रसिद्ध है कि जैसे राजा भले-बुरे आचरण करते हैं, वैसे ही उनकी प्रजा भी आचरण
करती है, इसलिए अपनी प्रजा को अच्छी शिक्षा देने के लिए तुम्हें अपनी प्रतिज्ञा का उल्लंघन नहीं
करना चाहिये। यों महर्षि वसिष्ठ दशरथ को उपदेश देते हैं ।
इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न होकर और स्वयं दशरथ जैसे राजा होकर भी यदि तुम अपने वचनों का
पालन नहीं करते हो तो भला बतलाओ कि इस संसार में दूसरा कौन प्रतिज्ञा का पालन करेगा ?