Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 11, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 11, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
कथं ब्रह्मन्मगवतो लोके ज्ञानावतारणे ।
सर्गादनन्तरं बुद्धिः प्रवृत्ता परमेष्ठिनः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त पुण्यपरिपाक की किन लक्षणों से पहचान करनी चाहिए एवं उस लक्ष्यभूत पदार्थ के
उपदेश की प्रणालिर्यो कैसी है 2 इस बात को प्राचीन कथा के विस्तार के श्रवण द्वारा जानने के
इच्छुक श्रीरामचन्द्रजी ने कहा :
ब्रह्मन्, सृष्टि करने के अनन्तर भगवान् ब्रह्माजी की बुद्धि इस लोक में ज्ञान के अवतारण
के लिए किस प्रकार हुई ? कृपया उस प्रकार को विस्तार से कहिए