Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 18, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 18, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मोपदेशे दृष्टान्तो यस्तवेह हि कथ्यते ।
एकदेशसधर्मत्वं तत्रान्तः परिगृह्यते ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो पूर्व श्लोक में परम ब्रह्म को छोड़ कर” कहा है, उसे विशेषरूप से स्पष्ट करते हैं ।
मैं यहाँ ब्रह्मोपदेश में आपसे जो दृष्टान्त कहता हूँ, उसमें एक देश का साधर्म्य लेकर
प्रस्तुत अर्थ का निर्णय किया जाता है । भाव यह कि जगद्रूप विवर्त के अधिष्ठान ब्रह्म के
बोधन में सर्परूप विवर्त के अधिष्ठान का बोधक रज्जुदृष्टान्त अधिष्ठान का विवर्त होता है,
केवल इसी एक अंश में दिया जाता हे, दार्ष्टन्तिक ब्रह्म में रहनेवाले नित्यत्व, सुखित्व आदि
सम्पूर्ण अंशो में नहीं