Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 19, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 19, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
स्वयमेव विचारस्तु स्वत उत्थं स्वकं वपुः ।
नाशयित्वा करोत्याशु प्रत्यक्षं परमं महत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
विचार
(विचार से उत्पन्न आत्मसाक्षात्कार) भी अपने से उत्पन्न ओर परमार्थरूप से अपने से अभिन्न
ही जगदृरूप शरीर को अज्ञान के विनाश द्वारा विनष्ट कर तत्त्वज्ञ पुरुषों को आत्मभूत अनावृत्त
अपरिच्छिन्न परम पुरुषार्थ को प्राप्त कराता हे