Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 19, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 19, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
शान्तिः श्रेयः परं विद्धि तत्प्राप्तौ यत्नवान्भव ।
भोक्तव्यमोदनं प्राप्तं किं तत्सिद्धौ विकल्पितैः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि सम्पूर्ण संसार की शान्ति होने पर उसके अन्तर्गत दरष्टान्त, युक्ति
आदिका भी बाध होनेसे उनमें अभासता होगी, ऐसी आशंका पर फलसिद्धि के पश्चात् साधन
की क्षति होना कोई दोष नहीं है, ऐसा कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, आप शान्ति को परम कल्याण समझिए, उसीकी प्राप्ति के लिए यत्न
कीजिए । भोजनयोग्य भात यदि पक गया, तो उसके पाक में साधनभूत दृष्टान्त आदि के
मिथ्या होने से क्या क्षति है ?