Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 2, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 2, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
विश्वामित्र उवाच ।
तस्य व्यासतनूजस्य मलमात्रोपमार्जनम् ।
यथोपयुक्तं ते राम तावदेवोपयुज्यते ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीशुकदेवजी की आख्यायिका की प्रकृत में संगति दिखला रहे एवं श्रीरामचन्द्रजी को उपदेश देने
के लिए श्रीवसिष्ठजी को उत्साहित कर रहे श्रीविश्वामित्र जी बोले : श्रीरामचन्द्र, जिस प्रकार व्यासपुत्र
श्री शुकदेवजी के केवल मनोमालिन्य के मार्जन के लिए उपपत्तियुक्त उपदेश की आवश्यकता थी
इसलिए उनका जनकके समीप में जाकर उपदेश ग्रहण करना आवश्यक हुआ था वैसे ही तुम्हारा भी
मनोमालिन्य का मार्जन आवश्यक हे
सर्ग सन्दर्भ
पहला सर्ग समाप्त दूसरा सर्ग श्रीरामचन्द्रजी को उपदेश देने के लिए प्रार्थित श्रीवसिष्ठजी को श्री विश्वामित्रजीका प्रोत्साहित करना ।