Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 4, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 4, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
साधूपदिष्टमार्गेण यन्मनोङ्गविचेष्टितम् ।
तत्पौरुषं तत्सफलमन्यदुन्मत्तचेष्टितम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
वह पौरुष (पुरुषप्रयत्न) क्या है, जिसकी आप इतनी बड़ी प्रशंसा करते हैं ? इस प्रश्नपर
कहते हैं।
शास्त्रज्ञ सज्जन पुरुषों द्वारा उपदिष्ट रीति से जो मानसिक, वाचिक और कायिक चेष्टा
की जाती है, वही पौरूष है, वह सफल है, उससे भिन्न जो मन, वचन और शरीर की चेष्टा है
वह उन्मत्त की चेष्टा है