Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 100, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
फलपुष्पलतापत्रशाखाविटपमूलवान् ।
वृक्षबीजे यथा वृक्षस्तथेदं ब्रह्मणि स्थितम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
पुरुषोंमें शोकशक्ति, प्रसन्न जीवमें आनन्दशक्ति, योद्धामें वीर्यशक्ति, विविध सृष्टियों में
सर्गशक्ति, प्राकृत प्रलयमें प्रकृतिमें उनकी सर्वशक्तिता है, क्योंकि वही सब कार्योकी बीजभूत
है॥९,१०।॥ जैसे वृक्ष के बीजमें फल, फूल, लता, पत्ते, शाखा, प्रशाखाएँ और तने से युक्त
वृक्ष रहता है, वैसे ही यह जगत् ब्रह्म में स्थित है