Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 100, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
करणं कर्म कर्ता च जननं मरणं स्थितिः ।
सर्वं ब्रह्मैव नह्यस्ति तद्विना कल्पनेतरा ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
करण, कर्म, कर्ता, जन्म, मरण, स्थिति, सब ब्रह्म ही है, उसके
सिवा कोई दूसरी कल्पना है ही नहीं