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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 101, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 101 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

अनिर्मिते द्वे सदने एकं निर्भित्ति तत्र वै । अभित्तिमन्दिरं चारु प्रविष्टास्ते नरास्त्रयः ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

उनमें दो भवन तो बने ही न थे, एक बिना दीवार का था । दीवाररहित सुन्दर भवन में वे तीनों पुरुष प्रविष्ट हुए