Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
देहे नष्टे क्षते क्षीणे कात्मनः क्षतिरागता ।
भस्त्रायां परिदग्धायां भस्त्रापूरो न नश्यति ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
नष्ट नहीं होती वैसे ही देह के नष्ट होने पर, कटने पर या क्षीण होने पर आत्मा की कोई क्षति
नहीं होती है