Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
इत्युक्तवत्यथ मुनौ दिवसो जगाम सायंतनाय विधयेऽस्तमिनो जगाम ।
स्नातुं सभा कृतनमस्करणा जगाम श्यामाक्षये रविकरैश्च सहाजगाम ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्री मुनिजी के ऐसा कहने पर दिन बीत गया भगवान् सूर्य अस्ताचल में डूब गये, सब
मुनियों की सभा महामुनि को नमस्कार कर सायंकाल की सन्ध्यावन्दन अग्निहोत्र आदि विधि
के लिए उठ गई और रात बीतने पर दूसरे दिन सूर्य की किरणो के साथ फिर सभा आ गई