Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 103, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 103 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
व्यामोहसंभ्रमानर्थदेशकालगमागमाः ।
चेतसः प्रभवन्त्येते पादपादिव पल्लवाः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वृक्ष से पल्लव (नये-नये
पत्ते) उत्पन्न होते हैं वैसे ही मोह, भ्रम, अनर्थ, देश, काल, गमन ओर आगमन ये सब मन से
ही उत्पन्न होते हैं