Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 103, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 103 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियाद्रव्यशक्तिपर्याकुलीकृतम् ।
भावाद्भावान्तरं याति लोलत्वान्नटवन्मनः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे नट एक पात्र के आकार से दूसरे पात्र के आकार को
धारण करता है वैसे ही देश, काल, क्रिया और द्रव्य की शक्ति से व्याकुल हुआ मन चंचल होने
के कारण एक वस्तु के आकार से दूसरी वस्तु के आकार को प्राप्त होता है