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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 104, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

गायत्किन्नरगन्धर्वकदलीखण्डमण्डपः । मन्दानिलरवोद्भूतः पुष्पोपवनपाण्डुरः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके केलों के मण्डपों में किन्नर और गर्न्धव गाते थे । मन्द-मन्द वायु के शब्दों से वह बड़ा रमणीय था। फूलों से भरे हुए उपवनों से वह सफेद था