Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 105, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
रराज राजा सौम्यास्यमुन्मीलितविलोचनः ।
गते हिमर्तावुल्लासिपुष्पौघ इव माधवः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
वह राजा, जिसके
लोचन प्रफुल्लित थे, मनोहर मुख से युक्त होकर ऐसे सुशोभित हुआ जैसे कि हेमन्त ऋतु के
बीत जाने पर फूलों के समुह से युक्त वसन्त उल्लसित होकर सुशोभित होता हे