Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 105, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
राजोवाच ।
इह विविधपदार्थसंकुलायां ह्रदनदपत्तनपर्वताकुलायाम् ।
कुलशिखरिसमुद्रसंकरायां भुवि विभवावलितोऽस्त्ययं प्रदेशः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
आगे कही जानेवाली कथा के उपोद्घातरूप से पहले सर्वजनप्रसिद्ध भूमि के अन्तर्गत
अपने स्वदेश की सत्ता का अनुवाद करते हैं।
राजा ने कहा : हे सभासदों, विविध विचित्र वस्तुओं से ठसाठस भरी हुई, तालाब, नदी,
नद, नगर और पर्वतों से व्याप्त तथा कुलपर्वत और समुद्रों से युक्त इस पृथ्वी में विविध
विभवों से परिवेष्टित यह प्रदेश है