Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 106, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 106 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
ततस्तयौदनादर्धं मह्यमेकं समर्पितम् ।
माधव्येवामृतादर्धमिन्द्रायार्तिमहत्पुरा ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे प्रतिज्ञा करने के उपरान्त जैसे प्राचीन काल में मोहिनीरूप
धारण किये हुए भगवान् ने आधा अमृत इन्द्र को दिया वैसे ही उसने आधा भात मुझे दे दिया।
उसीको मेने क्षुधा की पीड़ा से बहुत समझा