Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 108, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 108 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
आजाविव शरौघेषु सुखदुःखेष्वनारतम् ।
कलहेष्वप्यकार्येषु चागच्छत्सु पतत्सु च ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे युद्ध में वाणो के समूह लगातार
आते ओर जाते हैँ वैसे ही सुखदुःख, लडाई - झगड़ा, अकरणीय चोरी, सीनाजोरी आदि
कार्य आने-जाने लगे