Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 111, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
मृते भ्रातरि भृत्यादौ क्लेश आक्रियतेऽनृतः ।
तत्स्वचित्तं स्वचैतन्यव्यावृत्तात्मेति मे मतिः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
लोग भाई, सेवक आदि के मरने पर व्यर्थ शोक करते
हैं, वह निर्विकार अपने चैतन्य से पृथग्भूत अपना चित्त ही है, ऐसा मेरा निश्चय हे