Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 111, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
स्वसंवेदनयत्नेन पाल्यते चित्तबालकः ।
अवस्तुतो वस्तुनि च योज्यते बोध्यतेऽपि च ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्ममात्राकार-वृत्तिधारारूपी प्रयत्न से
चित्तरूपी बालक की राग, चपलता आदि रोगों के प्रतिकार द्वारा रक्षा की जाती है, वह अवस्तु
से हटाकर वस्तु में (तत्त्व में) लगाया जाता है और बोधित किया जाता है