Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 113, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 113, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 113 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
येयमाभोगिनिःसारा संसारारम्भचक्रिका ।
विज्ञेया वासनैषा सा चेतसो मोहदायिनी ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जो यह कृत्रिम वेषवाली सारविहीन संसाररूप घट-शरावों को उत्पन्न करनेवाली
चक्रिका (कुम्हार की छोटी चाक) है, उसे आप चित्त को मोह में डालनेवाली वासना
जानिये