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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

असंकल्पो ह्यविद्याया निग्रहः कथितो बुधैः । यथा गगनपद्मिन्याः स भाति सुकरः स्वयम् ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रासंगिक प्रश्न का समाधान कर प्रस्तुत विषय को कहते हैँ । जैसे आकाशकमलिनी का निग्रह संकल्प का अभाव हे, वैसे ही विद्वानों ने संकल्प के अभाव को अविद्या का निग्रह कहा है । संकल्प का अभाव सहज प्रतीत होता हे, कठिन नहीं है