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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 114, Verse 70

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 114, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 114 · श्लोक 70

संस्कृत श्लोक

नभोनगरनिर्माणपातोत्पातनसंभ्रमाः । स्वप्नादिष्वनुभूयन्ते विचित्राः सुखदुःखदाः ॥ ७० ॥

हिन्दी अर्थ

इसीसे आकाश में नगर की रचना, आकाश से गिरना, आकाश में उडना आदि भ्रम, जो विचित्र ओर सुख-दुःख देनेवाले है, स्वप्न में पुरुषों से अनुभूत होते हैं