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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 115, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

तस्येमान्यप्रबुद्धस्य न प्रबुद्धस्य राघव । सुखदुःखान्यनन्तानि शरीरस्य न कानिचित् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे राघव, अप्रबुद्ध जीव के ये अनन्त सुख-दुःख होते हैं ओर प्रबुद्ध के नहीं होते । शरीर के भी ये सुख-दुःख आदि नहीं होते