Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 115, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
अहो नु चित्रं पद्मोत्थैर्बद्धास्तन्तुभिरद्रयः ।
अविद्यमाना या विद्या तया सर्वे वशीकृताः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : मुनिवर, जो अविद्या है ही
नहीं, उसने सब लोगों को वश में कर लिया, यह बड़े आश्चर्य की बात हे । यह कथन तो कमल
के नाल से उत्पन्न हुए तन्तुओं से पर्वतो को बाँधने के तुल्य है