Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 115, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 115, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 115 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अस्याः संसारमायाया नद्यास्त्रिभुवनाङ्गणे ।
रूपं मदवबोधार्थं कथयानुग्रहात्पुनः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
त्रिभुवन रूप आँगन में स्थित इस संसारमायारूप नदी का स्वरूप मेरे ज्ञान के
लिए फिर कहिए